Puri Express And Fear Of Wife

Puri Express सुबह 4 बजे अहमदाबाद के रेल्वे स्टेशन से निकल चुकी थी,मै भागते दौडते जनरल डब्बे मे पोहचा तो डब्बे मे एक खाली सिट देखकर बैठ गया,यहा पोहचते ही तुम्हे ये ऐहसास होता है कि पुरा हिंदुस्थान ईस डब्बे मे सफर कर रहा है. मेरा कोई रिझर्वेशन नही था ईसीलीए मै ईस ड्बे मे घुस गया ये रही आपको बताने की बात पर दरसंल पैसो की मेरे जेब से नाराजगी मुझे हरबार ईस डब्बे मे ले आती है.

 रेल के जनरल डब्बे मे एक आदमी परेशान बैठा था,किसीने मुझे बताया की उसकी चप्पल उसने कही रख दी थी और अब वो याद नही कर पा रहा है की उसने वो कहा रखी.मैने उनके पास जाकर कहा “अरे दादाजी एक चप्पल ही तो खोई है आप इतना परेशान क्यु हो रहे हो दुसरी ले लिजींये ” उसपर वो बोले “बेटा तुम्हे पता नही ये चप्पल मुझे मेरी बिवी ने अभी अभी दिलवायी है अगर गलती से भी वो कही खो गई तो वो मुझे कच्चा चबा जायेगी घर के अंदर ही नही लेगी”.

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